आध्यात्मिक आकाश में जगमगाता नक्षत्र
“
सन् 2003 का साल था और जनवरी का महीना। अच्छी तरह याद कड़कड़ाती सर्दी के जब इंदौर के दशहरा मैदान पर आग बरसने का अहसास हज़ारों लोगों ने किया। यहॉं मुनिश्री तरुणसागरजी आए हुए थे और हर दिन सुबह की सर्द हवाओं को चीरती उनकी वाणी को सुनने शहरभर के लोग दौड़ आते थे। अकेले [...]
राष्ट्र के नाम संदेश
मुनिश्री ने अपनी गो-हत्या और पशु-मांस निर्यात के खिलाफ एक अहिंसात्मक राष्ट्रीय आन्दोलन छेड़ाऔर पूरे देश में अहिंसा की अलख जगा दी। 30 नवम्बर, 1997 को लालकिले से इसका शंखनाद किया और 1 जनवरी, 2000 को इसकी पूर्णाहुति के रूप में लालकिले पर ही एक ऐतिहासिक ‘अहिंसा महाकुंभ’ संपन्न किया जिसमें मुनिश्री [...]
क्यों जरूरी है गुरु से ?
21 जुलाई 2005 को बेलगांव में सचमुच इतिहास रच गया। जहां पूज्यश्री ने शताधिक शिष्यों को गुरु मंत्र दीक्षा दी, वहीं समवशरण में कमलासन पर विराजमान होकर शिष्यों के भोले एवं जटिल प्रश्नों के लाजवाब उत्तर भी दिए। लोगों का कहना था कि महावीर स्वामी के समवशरण के बारे में अब तक [...]
एक और कबीर - मुनिश्री तरुणसागर
भारत का इतिहास संत और मुनियों की गौरवमय गाथाओं से भराहुआ है। इस देश की धरती पर अनेक तीर्थंकर, अवतार एवं संत-पुरुष अवतरित हुए, जिन्होंने अपने चिन्तन और चर्या से समाज व राष्ट्र को जीने की सही दिशा और प्रेरणा दी। महापुरुषों की इस अविछिन्न परम्परा में जैन मुनिश्री तरुणसागरजी एक ऐसे ही क्रान्तिकारी संत [...]
मुक्तिपथ की ओर
एक चम्मच दही पूरे दूध को बदल देता है। यही मुनिश्री तरुण सागर जी के साथ हुआ। आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी के एक वाक्य ने उनका पूरा जीवन बदल दिया। उस समय मुनिश्री की उम्र यही कोई बारह-तेरह साल की रही होगी और वे छटवीं कक्षा में पढ़ रहे थे। एक [...]
बीमार दिलों और बिगड़े दिमागों को ठीक करता एक दिगम्बर सन्त
अपने मुख और मुद्राओं से वे विनोबा नजर आते हैं। उनकी बौद्धिक प्रखरता विवेकानंद की याद दिलाती है। रूढ़ियों को रौंदने में वे ओशो का अनुसरण करते दिखते हैं। जनसमूह का मानस पढ़ने में वे किसी सिद्ध मनोवैज्ञानिक को भी मात दे सकते हैं। हजारों की भीड़ को रिझाने में कोई हंसोड़ [...]