परिचय

सबसे खास : कई किताबें लिखी, जिसमें सबसे मशहूर ‘कड़वे-प्रवचन (भाग 1, 2, 3 और अब 4 भी)’ रही। अब तक 6 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। और 4 लाख प्रतियां बिक चुकी है।जो कि जैन इतिहास में विश्व रिकार्ड है.
पूर्वनाम : पवनकुमार जैन
जन्म : 26 जून, 1967 को दमोह जिले (म.प्र.) के गुहंची गांव में
माता-पिता : महिला रत्न श्रीमती शांतिबाई जैन एवं श्रेष्ठ श्रावक श्री प्रतापचंद्र जैन
तन : दुबला-पतला। चेहरे पर हरदम मुस्कान और शरीर हमेशा ऊर्जावान
मन : पवित्र और निर्मल। महावीर वाणी के विश्वव्यापी प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित
क्षुल्लक दीक्षा : 18 जनवरी, 1982 अकलतरा (म.प्र.)
मुनि दीक्षा : 20 जुलाई , 1988 बागीदौरा (राज.)
जीवन :
  • 13 वर्ष की उम्र में संन्यास, 20 वर्ष में दिगम्बर मुनि दीक्षा
  • 33 वर्ष में लाल किले से राष्ट्र को संबोधन
  • 35 वर्ष में ‘राष्ट्रसंत’ की पदवी से नवाजे गए
  • 37 वर्ष में ‘गुरु मंत्र दीक्षा’ देने की नई परंपरा की शुरुआत
कीर्तिमान :
  • आचार्य कुन्दकुन्द के पश्चात् गत दो हजार वर्षों के इतिहास में मात्र 13 वर्ष की उम्र में जैन संन्यास धारण करनेवाले प्रथम योगी
  • राष्ट्र के प्रथम मुनि जिन्होंने लाल किले (दिल्ली) से संबोधा
  • जी. टीवी के माध्यम से भारत सहित 122 देशों में ‘ महावीर वाणी’ के विश्वव्यापी प्रसारण की ऐतिहासिक शुरुवात करने का प्रथम श्रेय
  • -भारतीय सेना को संबोधित करनेवाले देश के पहले संत
  • आजादी के बाद प्रथम बार राजभवन (बैंगलोर)में अतिविशिष्ट लोगों को सम्बोधन एवं आहारचर्या.
प्रख्याति : ‘क्रांतिकारी संत’ के रुप में
भारत पदयात्रा : नई सदी की पहली सुबह 1 जनवरी, 2000 को मांस निर्यात और पशु-हत्या के खिलाफ राष्ट्रीय अहिंसात्मक आदोलन का नेतृत्व करते हुए लाल किले पर ऐतिहासिक ‘अहिंसा महाकुंभ’ संपन्न किया और फिर अहिंसा, शांति, देशप्रेम, अध्यात्म और सामाजिक सद्भाव के लिए भारत-भ्रमण यात्रा शुरु की.

    यात्रा के चरण -

  • 2000 - हरियाण
  • 2001 - राजस्थान
  • 2002 - मध्य प्रदेश
  • 2003 - गुजरात
  • 2004 - महाराष्ट्र
  • 2005 - कर्नाटक
  • 2006 - कर्नाटक
  • 2007 - महाराष्ट्र
  • 2008 - महाराष्ट्र
साहित्य : 3 दर्जन से अधिक पुस्तके उपलब्ध और उनकी अब तक 10 लाख से अधिक प्रतियॉं बिक चुकी है.
सम्मान : 4 राज्यों (म.प्र, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक) की सरकार द्वारा ‘ राजकीय अतिथि ’ का सम्मान
प्रमुख वक्ता : अंतर्राष्ट्रस्तरीय भगवान बाहुबली के महामस्तकाभिषेक महोत्सव-2006 में
राष्ट्रसंत : म.प्र. शासन द्वारा 26 फरवरी, 2003 को दशहरा मैदान, इंदौर में
पहचान : देश में सर्वाधिक सुने और पढ़े जानेवाले तथा दिल और दिमाग को झकझोर देने वाले अद्भुत प्रवचन। अपनी नायाब प्रवचन शैली के लिए देशभर में विख्यात मुनि के रुप में पहचान