राष्ट्रप्रीति की छाया में राजनिति हो तो ठीक है - मुनि तरुणसागर | Tarunvani

राष्ट्रप्रीति की छाया में राजनिति हो तो ठीक है - मुनि तरुणसागर

औरंगाबाद(महा) 10 अगस्त- क्रांतिकारी राष्ट्रसंत मुनिश्री तरुणसागरजी ने कहा कि राष्ट्रप्रीति की छाया में यदि राजनिति होती है तो बुरी नहीं है। लेकिन आदमी अगर राष्ट्रप्रीति चूक जाये और केवल राजनिति खेलता रहे तो अच्छा नहीं।

जैन मुनि श्री तरुणसागरजी तापडिया-कासलीवाल प्रॉपर्टीज प्रांगण में निर्मित भव्य और विशाल पंडाल में अपनी कड़वे-प्रवचन माला के विशेष शृंखला के शुभारंभ में बोल रहे थे। कार्यक्रम में राष्ट्रसंत भैय्यूजी महाराज, स्वामी श्री हरीचैतन्य महाप्रभु, सासद चंद्रकांत खैरे, विधायक राजेंद्र पाटणी, विधायक डॉ. कल्याण काले, साहित्यकार सुरेश सरल. गायिका संगीता जैन, सहित अनेक गणमान्य एवं 30 हजार से अधिक श्रध्दालु मौजूद थे। मुनिश्री ने कही कि, पद नहीं ,पादुका महत्वपूर्ण है। अगर प्रभु के प्रति मन में भक्ति है तो पद स्वतः आदमी के पीछे पीछे चलतेहै। बछडा हजारों गायों के बीच अपनी मॉं को पहचान लेता है, उसी तरह कर्म भी हजारों व्यक्ति के बीच व्यक्ति को पहचान लेता है। भैय्यूजी महाराज ने कहा कि महावीर दुनिया में पहले ऐसे दार्शनिक थे जिन्होंने वर्णव्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की। स्वामी हरीचैतन्य महाप्रभु ने कहा कि यदि व्यक्ति को ठीक ठंग से रहना, कहना और सहना आ जाये तो वह आज भी सुखी हो सकता है। समारोह में तरुणसागर साहित्य केंद्र के संयोजक संत्येंद्र रावकां इंदौर, जगदीश पोरवाल, पवन पोरवाल ने भी श्रीफल भेंट किया।

इसी प्रवचन माला के अंतर्गत यहांपर एक विशाल दुनिया का सबसे बडा ग्रिंटींग कार्ड का निर्माण चल रहा है। 1000 फीट लंबे इस ग्रिंटींग कार्ड पर 15 से 17 अगस्त के बीच देशभर से लगभग 1000 भक्तों द्वारा मुनिश्री के प्रति विनयांजलि लिखी जायेेगी तत्पश्चात यह कार्ड मुनिश्री को भेंट किया जायेगा। इस विशाल कार्ड का नाम दुनिया का सबसे लंबा ग्रिंटींग कार्ड के अंतर्गत ग्रिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में लिखे जाने की पुरी संभावना है। कार्यक्रम के पश्चात श्री कांतिकुमार जैन द्वारा महाप्रसादी रखी गई। कड़वे प्रवचन माला का शुभारंभ अतिथीयोंके दीप प्रज्वलन से हुआ। मुनिश्री की यह प्रवचन श्रृंखला आगामी 17 अगस्त तक चलेगी।